ALL राजस्थान अंतर्राष्ट्रीय राष्ट्रीय लेख अध्यात्म सिने विमर्श वाणिज्य / व्यापार
80 किलोमीटर दूर कोटा से टीम बुलाकर कराया माँ का नेत्रदान
March 6, 2020 • तहलका ब्यूरो • राजस्थान
नेत्रदान के कार्य से जुड़े थे, माँ का भी नेत्रदान कराया
 
कोटा। पिछले 10 सालों से जयपुर में रह कर आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान के साथ मिलकर नेत्रदान अभियान के जागरूकता कार्यक्रम में लगातार सहयोग कर रहे मंगलपुरा,झालावाड़ निवासी अनन्त अग्रवाल की माताजी ललिता देवी का आज सुबह झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में निधन हो गया ।  
 
निधन की सूचना मिलते ही अनन्त जयपुर से झालावाड़ के लिये रवाना हो गया,शोक के समय के बावजूद उनको यह ध्यान रहा की, किसी भी तरह से माँ के नेत्रदान तो करवाने ही है । उसने अपने दोनों बड़े भाई महेंद्र, विजेंद्र से बात कर  माँ के नेत्रदान करवाने के लिये राज़ी किया। अनंत जी ने मेडिकल कॉलेज के आईसीयू विभाग के चिकित्सकों के सामने अपनी माँ के नेत्रदान करवाने की इच्छा जाहिर की। 
 
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष एम एल गुप्ता जी ने, शाइन इंडिया फाउंडेशन को कोटा में संपर्क किया, शाइन इंडिया झालावाड़ की शहर संयोजिका अंजना विजय ने स्वर्गीय ललिता देवी जी के, नेत्रदान करवाने से सम्बंधित जानकारी लेने के बाद कोटा टीम को रवाना होने के लिये कह दिया। 
 
कोटा से टीम दो घंटे में ललिता जी के निवास पर पहुँच गयी। तीनों बेटों महेंद्र,विजेंद्र ,अनन्त,बेटी सुनीता गोयल व उपस्थित सभी रिश्तेदारों के बीच संस्था सदस्यों ने नेत्रदान की प्रक्रिया को पूरा किया।  सभी लोंगो को बताया गया की नेत्रदान में पूरी आँख न लेकर सिर्फ कॉर्निया लिया जाता है,जो की मृत्यु होने के बाद 6 से 8 घंटों में मृत शरीर से प्राप्त कर लेना चाहिए। सर्दियों में 12 घन्टे, व रिश्तेदारों के बाहर होने पर यदि शव को डीप फ़्रीज में रखा गया है, तो 24 घंटे में भी नेत्रदान संभव है। 
 
नेत्रदान की इस प्रकिया में सिर्फ 10 मिनट का समय लगता है, इस दौरान किसी तरह का कोई रक्त स्राव नहीं होता है,और न चेहरे पर किसी तरह का कोई गड्ढा होता है ।
 
 
झालावाड़ में कॉर्निया लेने की सुविधा हो तो बढ़ सकता है - नेत्रदान
 
ललिता जी के पुत्र अनन्त अग्रवाल बताते है की,आज से 10 साल पहले,जब हमारे पिताजी मोहन लाल अग्रवाल की मृत्यु हुई थी,तब भी हम परिजनों ने सोचा था की पिता जी के भी नेत्रदान करवा दें,पर उस दौरान से लेकर आज 10 साल के दौरान भी मेडिकल कॉलेज झालावाड़ में कॉर्निया लेने की सुविधा प्रारंभ नहीं हो सकी है। यदि यहाँ पर ही कॉर्निया लेने की सुविधा प्रारंभ हो जाये तो,झालावाड़ के लोगों को कोटा से नहीं बुलाना होगा,साथ ही जितना जल्दी कॉर्निया मृत शरीर से निकल कर उसको संरक्षित रखने वाले द्रव्य एम के मीडियम में आ जाता है,तो उसकी गुणवत्ता ज्यादा अच्छा रहने की संभावना रहती है ।