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आज भी गुरुद्वारों में सर्वत्र भले की अरदास होती हैं।
November 15, 2019 • Bhavesh • अंतर्राष्ट्रीय

अजय नागर 

करतारपुर, पाकिस्तान। बाबा नानक ने 26 साल में लगभग 35000 किलोमीटर पैदल चलकर पूरे विश्व मे भाईचारे का संदेश दिया, आज भी गुरुद्वारों में सर्वत्र भले की अरदास होती हैं। बाबा नानक ने अपनी शिक्षा में तीन बातो पर जोर दिया हैं। मेहनत की कमाई करो, नाम जपो और जो आपके पास है उसे बांटकर खाओ। देश के बंटवारे के साथ ही बाबा नानक का जन्मस्थान और कार्यक्षेत्र सभी जगह पाकिस्तान में चले गए। करतारपुर में बाबा ने मेहनत से खेती करी, वही पर नाम जप कर कहाँ कोई हिन्दू नही, कोई मुसलमान नही सभी एक हैं। वो हैं “एक ओंकार”।

आज़ादी के बाद से ही श्रद्धालु देश की सीमा पर जाकर दूरबीन से दरबार साहिब के दर्शन कर सकते थे। आज़ादी के 72 साल बाद बाबा नानक ने सभी श्रद्धालुओं की अरदास सुनी और भारत व पाकिस्तान दोनों देशों की सरकार के सहयोग से बाबा के 550 वे प्रकाश पर्व के दिन करतारपुर साहिब दर्शन का रास्ता सुगम हो पाया हैं। 

गुरु नानक के 550 वे पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ हैं। बॉर्डर पर पाकिस्तान की तरफ दूर से ही देखकर करतारपुर साहिब को दंडवत प्रणाम कर रहे हैं। जब की गुरु पर्व के दिन पाकिस्तान द्वारा 20 डॉलर भी नही लिए जा रहे थे।
जानकारी के अभाव में श्रद्धालुओं ने पंजीकरण भी नही करवाया और पासपोर्ट भी नही हैं बल्कि वोटर आई डी, आधार व अन्य पहचान पत्र के साथ पहुँच रहे हैं। जिसके कारण श्रद्धालुओं को देश की सीमा से ही दर्शन करने पड़ रहे हैं। पंजीकरण व पासपोर्ट के अभाव में करतारपुर साहिब नही जाने दिया जा रहा हैं। 

दरबार साहिब करतारपुर जाने के लिए भारत के किसी भी कोने से रेल मार्ग द्वारा अमृतसर पहुँचा जा सकता हैं। अमृतसर से रेल व बस मार्ग से डेरा बाबा नानक पर पहुँचा जा सकता हैं। डेरा बाबा नानक आकर दरबार साहिब डेरा बाबा नानक के दर्शन करें, मत्था टेके। यहाँ पर रुकने की व्यवस्था हैं, यहाँ पर रुककर, नहा धोके, लंगर चखकर कॉरिडोर के लिए प्रस्थान करना चाहिए। 1 किलोमीटर पैदल चलकर कॉरिडोर पहुँचा जा सकता हैं। प्रातः 8 बजे से श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रारंभ हो जाता हैं, जो 2-3 बजे तक चलता रहता हैं, उसके बाद श्रद्धालुओं का लौटने का सिलसिला प्रारंभ हो जाता हैं। श्रद्धालुओं को जिस दिन जाना हैं उसी दिन वापस आना होता हैं। इमिग्रेशन प्रक्रिया में लगभग 1 घंटे का समय खर्च होता हैं। पाकिस्तान समय मे भी हमारे से पीछे हैं, घड़ी में आधे घण्टे का फर्क हैं। हमारे यहाँ साढ़े 9 का समय हैं तो पाकिस्तान में 9 बजते हैं। 

श्रद्धालुओं द्वारा रास्तो को तोरणद्वार से सजाया हुआ हैं, जगह जगह लंगर चल रहे हैं जिसमे सभी श्रद्धालुओं द्वारा लंगर छखा जा रहा हैं। संगत और पंगत साथ साथ चल रही हैं। आने वाले यात्रियों के लिए पूछताछ केंद्र भी सड़को पर समाजसेवियों द्वारा लगाए हुए हैं। जब से कॉरिडोर की शुरआत हुई हैं तभी से दर्शनार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी होती जा रही हैं। 

बॉर्डर पर शहीद बाबा सिद्ध सिंह रंधावा का गुरुद्वारा बना हुआ हैं। यहाँ पर भी मेले का सा माहौल बना हुआ हैं। श्रद्धालुओं द्वारा यहाँ भी मथ्था टेककर अरदास की जा रही हैं। यह गुरुद्वारा आज़ादी से भी पहले का हैं, वही मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया कि गुरुद्वारा 4 मार्च 1652 को बना था। यह गुरुद्वारा डेरा नानक बाबा से 2 किलोमीटर दूरी पर भारत पाक सीमा पर बना हुआ हैं।गुरदासपुर जिला विधिक सहायता केंद्र द्वारा पूछताछ के लिए सहायता केंद्र भी लगाया हुआ हैं, जहाँ पर विधिक जानकारी प्रदान की जा रही थी। 

डेरा बाबा नानक में श्री चौला साहिब गुरुद्वारा में बाबा नानक का चौला आज भी सुरक्षित रखा हुआ हैं। करतारपुर साहिब के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालु यहाँ भी मत्था टेककर अरदास करते हैं। करतारपुर साहिब के साथ ही बाबा नानक डेरा बाबा नानक साहिब में भी रहे थें। बाबा नानक अपने हाथों से खेती करते थे। आज भी दरबार साहिब डेरा बाबा नानक पर वो कुवा स्थित हैं जिससे बाबा नानक पानी सींचकर खेती करते थे। श्रद्धालुओं की मान्यता हैं कि इस कुवें का पानी चखने पर असाध्य बीमारियों से छुटकारा मिल जाता हैं, श्रद्धालुओं की आस्था इतनी गहरी हैं कि जिनके संतान नही होती बाबा नानक उनकी भी अरदास सुनते हैं। वर्तमान में कुवाँ दरबार साहिब की नीचे स्थित हैं। 

पंजाब सरकार द्वारा बसों की सुविधा निःशुल्क कर रखी हैं जिसमे बैठकर श्रद्धालु डेरा बाबा नानक पर पहुँच रहे हैं। श्रद्धालुओं के लिए टेंट सिटी भी बसा रखी हैं जिसमे पूरी व्यवस्था हैं। कमरा, वाशरूम आदि वो भी निःशुल्क। भारत सरकार द्वारा जगह जगह से रेलयात्रा भी निःशुल्क चला रखी हैं।

भारत सरकार ने बाबा नानक के 550 वे पर्व पर 550 ₹ का सिक्का व डाक टिकट जारी किया हैं जिसे भारत सरकार की मुम्बई मिंट से वेबसाइट द्वारा ऑनलाइन 2375₹ में खरीदा जा सकता हैं। टिकट के लिए पोस्ट ऑफिस के फिनेटली से खरीद सकते हैं। गुरुद्वारा शिरोमणि प्रबंध कमेटी द्वारा भी सोने चांदी के सिक्के जारी किए हैं जो स्वर्ण मंदिर गुरुद्वारा कार्यालय से खरीद सकते हैं।

पाकिस्तान द्वारा भी बाबा नानक के 550 वें प्रकाश पर्व को याद में संजोए रखने के लिए 550 रुपये का सिक्का जारी किया हैं। श्रद्धालु इस सिक्के को सहज ही 550 पाकिस्तानी मुद्रा देकर प्राप्त कर सकते हैं। सिक्का वितरण के लिए पाकिस्तान ने पाकिस्तान भारत सीमा पर बिक्री केंद्र खोल रखा हैं। इसके साथ ही बाबा नानक पर 20 रुपये मूल्य का डाक टिकट भी जारी किया हैं। डाक टिकट के लिए करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के पास ही बिक्री केंद्र खोल रखा हैं। श्रद्धालु वहाँ से टिकट खरीद सकते हैं। नेपाल सरकार द्वारा भी बाबा नानक के 550 वे पर्व पर 100, 1000, 2500 नेपाली रुपये का सिक्के जारी किए है।