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अपनी पार्टी में हालात सुधारने का प्रयास करें मुख्यमंत्री: पूनियां
March 11, 2020 • तहलका ब्यूरो • राजस्थान

बसपा विधायकों को किसने खरीदा, बताएं गहलोत: डाॅ. पूनियां


जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा में उनका स्वागत और अभिनंदन है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के इस बारे में दिए गए बयान ‘‘बड़ी बेशर्मी से हाॅर्स ट्रेडिंग हो रही है’’  पर पलटवार करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस ने जनता से झूठे वादे करके सत्ता प्राप्त की थी। उन वादों को पूरा नहीं करने के कारण जनता और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं में रोष है। इसी कारण ज्योतिरादित्य सिंधिया लंबे समय से मेनिफेस्टो को लागू करने की मांग कर रहे थे और सड़कों पर उतरने की बात भी कही जा रही थी। जब उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हुई, तब उन्होंने कांग्रेस छोड़ने का फैसला लिया। इसमें भाजपा क्या कर सकती है? इसी तरह राजस्थान में भी किसानों की कर्ज माफी, बेरोजगारों को रोजगार भत्ता देने का वादा सरकार पूरा नहीं कर पा रही है। इसके अतिरिक्त भी कई झूठे वादे करके पूरे नहीं करने के कारण जनता में कांग्रेस सरकार के प्रति रोष व्याप्त है।


डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत ने छह महीने पहले बसपा के विधायकों को हाॅर्स ट्रेडिंग के जरिए कांग्रेस में शामिल किया था, जब उनकी शर्म कहां थी। यह पहला वाकिया नहीं है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में हाॅर्स ट्रेडिंग के जरिए, बसपा विधायकों को कांग्रेस में शामिल किया था। जब दो बार ऐसा करने के बाद भी मुख्यमंत्री गहलोत को शर्म महसूस नहीं हुई, तो उन्हें इस तरह का बयान देने का कोई हक नहीं बनता। इस तरह की हाॅर्स ट्रेडिंग का इतिहास तो कांग्रेस का रहा है।  


डाॅ. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस और गहलोत अपनी सहूलियत से काम करते हैं। उनके हक में फैसला हो जाए तो संवैधानिक और देश हित में। उनके खिलाफ हो जाए तो, असंवैधानिक और देश के खिलाफ। मुख्यमंत्री गहलोत का यह बयान निराशा में दिया गया है, क्योंकि राजस्थान में भी कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है।


डाॅ. पूनियां ने कहा कि कांग्रेस से लोगों का मोहभंग हो रहा है, थोड़े दिनों में कांग्रेस मुस्लिम लीग जैसी होकर रह जाएगी। कांग्रेस राष्ट्र विरोधी नीतियों के प्रति अतिवादी समर्थन के चलते अप्रासंगिक हो रही है। कांग्रेस का विचार तुष्टीकरण का विचार है। राष्ट्रवाद के विरोध का विचार है। प्रधानमंत्री मोदी जी के विरोध का विचार है। सबसे बड़े संगठन आरएसएस का विरोधी विचार है। कांग्रेस की राजनीतिक, सैद्धान्तिक और व्यवहारिक तौर पर विदाई निश्चित है।