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भारत में उर्जा का संचय करने वाली इमारतें
February 8, 2020 • Bhavesh Nagar • लेख
त्रिपट गिरधर
वर्तमान में आधुनिक और रचनात्मक डिज़ाइनर्स ऐसी खूबसूरत आर्कीटेक्चरल संरचनाएं बना रहे हैं जो पर्यावरण संरक्षण में योगदान देती हैं, अनुसंधान से साफ है कि ये इमारतें धूप यानि सूरज की उर्जा का अधिकतम संभव इस्तेमाल करने में सक्षम हैं। 
 
इसके लिए आर्कीटेक्ट और डिज़ाइनर सूरज की लंबवत दिशा में सोलर पैनल लगाते हैं, जो अधिकतम मात्रा में सूरज की उर्जा को कैद कर इससे बिजली बनाते हैं। आज के डिज़ाइनर ऐसी आधुनिक इमारतों का निर्माण कर रहे हैं जो सूरज की उर्जा से बड़ी मात्रा में बिजली बना सकें।
 
भारत जैसे विकासशील देशों में रूफ-टॉप सोलर पावर सिस्टम, कमर्शियल इमारतों के लिए स्पष्ट विकल्प है, जो कार्यालय की बिजली संबंधी 20 फीसदी तक ज़रूरत को पूरा करती है, वहीं रिहायशी परिसर की बात करें तो पाया गया है कि रूफ-टॉप सोलर पावर सिस्टम से बिजली के बिल में 6.10 लाख रु तक की बचत की जा सकती है।
 
दुनिया भर में भर नव्यकरणी उर्जा के अग्रणी उत्पादक के रूप में उभर रहा है; सरकार हरित उर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए रिहायशी एवं कमर्शियल रूफटॉप सोलर सिस्टम के उपभोक्ताओं को 30 फीसदी तक छूट दे रही है। इसी के मद्देनज़र नवीन एवं नव्यकरणी उर्जा मंत्रालय ने भारत के राष्ट्रीय सोलर मिशन के माध्यम से रूफटॉप सोलर के द्वारा 2022 तक 40 गीगावॉट पावर उत्पादन का लक्ष्य तय किया है।
 
इस इनोवेशन का एक आधार यह भी है कि बड़ी विंडमिल्स, जिनका उपयोग दुनिया भर में पवन उर्जा के दोहन के लिए किया जाता हे, उनके विपरीत इस सिस्टम के अवयव पूरी तरह से स्थायी और रीसायक्लेबल हैं, जिन्हें सूरज की किरणों के लंबवत दिशा में लगाया जाता है।‘आज, इमारतों के डिज़ाइन के लिए क्रान्तिकारी दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, हम आधुनिक तकनीक के एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं जो आने वाले सालों में रचनात्मक, उर्जा-प्रभावी एवं पर्यावरण के अनुकूल इमारतों के साथ निर्माण उद्योग को नए आयाम देगा।’