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भारी भरकम बिजली के बिल ने जनता की उड़ाई नींद: सांसद दीयाकुमारी
April 22, 2020 • तहलका ब्यूरो • राजस्थान
राजसमन्द। जनता को भारी भरकम बिजली बिल थमाने को लेकर सांसद दीयाकुमारी ने गहलोत सरकार पर वादा खिलाफ़ी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के कारण पूरे राज्य में पिछले एक माह से लॉकडाउन है। कारखानों और उद्योगों में कार्य बंद है। आमजनता को जीवन यापन में मुश्किलात का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में बिल माफी तो दूर की बात, विद्युत विभाग द्वारा मनमर्जी से भारी भरकम बिल बनाकर भेजे जा रहे हैं। सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि 3 अप्रैल को पत्र भेजकर राज्य सरकार से दो माह के बिजली पानी के बिल माफी की मांग की थी लेकिन सरकार ने बिल माफी की बजाय बिल स्थगित करने का एलान कर दिया और उस पर भी अपने वादे पर कायम नहीं रह सकी। 
 
सांसद ने कहा कि राजस्थान की जनता खुद्दार है उसे फ्री का कुछ भी नहीं चाहिए लेकिन अप्रत्याशित परिस्थितियों से उत्पन्न विपत्तियों के कारण ऐसी गुहार लगानी पड़ रही है। यह जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। 
सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि अजमेर विद्युत वितरण निगम, जयपुर विद्युत वितरण निगम सहित प्रदेश के सभी निगमों में एक ही प्रक्रिया अपनाई गई है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार की मंशा में खोट है। जानबूझ कर की गई ऐसी प्रक्रिया सरकार और विभाग की असंवेदनशीलता को दर्शाती है जिसने सामान्य जनता की नींद उड़ा दी है।
 
मीडिया संयोजक मधुप्रकाश लड्ढा ने बताया कि सरकार की मंशा को जनविरोधी करार देते हुए सांसद दीयाकुमारी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बिजली बिल माफी पर पुनः विचार करने का आग्रह किया है। राजसमन्द भाजपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र पुरोहित, पूर्व जिलाध्यक्ष नन्दलाल सिंघवी, पूर्व चेयरमैन महेश पालीवाल, करणवीर सिंह राठौड़, पूर्व विधायक बंशीलाल खटीक,  श्रीकृष्ण पालीवाल, प्रवीण नन्दवाना, गोपाल कृष्ण पालीवाल, सुरेश जोशी, जवाहर जाट, सत्यदेव सिंह चारण, सुनील जोशी, महेंद्र सिंह चौहान, देशबन्धु रांका, प्रदीप खत्री, हिम्मत कुमावत, दीपक शर्मा, विकास चौधरी, धीरज पुरोहित, कमलेश कोठारी, प्रह्लाद वैष्णव, विनोद जोशी, भेरू नन्दवाना, भेरूलाल कच्छारा, राजकुमार अग्रवाल, सुभाष पालीवाल, नर्बदा शंकर पालीवाल सहित सैंकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने कठीन घड़ी में विद्युत निगम द्वारा जनता को बिजली बिल भेजने पर निराशा व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से पुनः विचार करने की मांग की है।