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झालावाड़: मनरेगा में गरीब महिलाओं को काम मिलने से परिवार का पालन-पोषण हुआ संभव
May 5, 2020 • तहलका ब्यूरो • राजस्थान

जयपुर। वैश्विक महामारी कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन 3.0 में भी लोगों को यथासंभव घरों में ही रहने का संदेश दिया जा रहा है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संक्रमण का असर कम होने के कारण सरकार की ओर से मनरेगा कार्य प्रारम्भ करने की छूट दी गई है। इसकी वजह से गाँव वालों के लिए मनरेगा आजीविका का साधन बन रही है। गांवों में जॉब कार्ड धारक श्रमिक परिवारों को मनरेगा में मजदूरी मिल रही है। प्रदेश का झालावाड़ जिला कोरोना के विरुद्ध लड़ी जा रही लड़ाई में ऐसी ही एक मिसाल पेश कर रहा है। 

झालावाड़ जिले की पंचायत समिति झालरापाटन के गांव कोलाना, अकतासा और टोल खेड़ा के तालाबों को गहरा करने में 200 ग्रामीण महिलाएं मनरेगा श्रमिक के रूप में कार्य कर रही हैं।  महिलाओं के बीच काम का बटवारा इस प्रकार किया गया है कि कार्यस्थल पर सोशल डिस्टेन्सिंग बनी रह सके। मनरेगा में मजदूरी की दर ₹182 से ₹220 किए जाने के कारण श्रमिक महिलाओं के चेहरों  पर खुशी की चमक है। इन महिलाओं का कहना है कि संकट के समय में सरकार द्वारा मनरेगा में मजदूरी उपलब्ध कराने से उनके परिवार का पालन-पोषण अच्छी तरह से हो सकेगा।

झालावाड़ जिले के इन गांवों में नियोजित महिला श्रमिकों में से अधिकतर के पति लॉकडाउन में काम-धंधे ठप होने के कारण बेरोजगार हो गए हैं। मनरेगा में काम मिलने से इन महिलाओं ने राहत महसूस की है। सरकार की ओर से मनरेगा कार्यस्थलों पर श्रमिकों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए ग्रुप में नियोजित करने के बजाय उचित दूरी रखते हुए अलग-अलग कार्य आवंटित किए जा रहे हैं। साथ ही विकास अधिकारियों को सभी श्रमिकों को मास्क लगाकर ही कार्य करवाने के निर्देश दिए गए हैं।