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कोरोना का कहर, डरे नहीं लडें
April 24, 2020 • तहलका ब्यूरो • लेख
हरकिशन भारद्वाज
समूची दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस की जद में है। महासंकट तथा महामारी की इस विपदा के दौरान भारत में 21000 से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं । संक्रमण को रोकने के लिए 40 दिनों का लोक डाउन जारी है। इसके बावजूद संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। देश-दुनिया में इस समय बहस चल रही है कि कोरोना किस वजह से फैला ? इसके लिए किसके सिर पर ठीकरा फोड़ा जाए? मौजूदा समय में पूरी कायनात द्वारा अभी तक कोई इलाज यह बचाव का टीका नहीं खोजा जा सका है। प्राणीविदों और रोग विशेषज्ञों की मानें तो दुनिया भर में प्राकृतिक स्रोतों के विनाश में मानवों के बीच उन बीमारियों को फैलाने का काम किया है जो कभी प्रकृति की गोद में छिपी रहती थी। प्राकृतिक स्रोतों में संसाधनों को नुकसान पहुंचाने में मानव कहीं पीछे नहीं हट रहे। जिसका दुष्परिणाम देखने को मिल रहा है।
 
कोरोना के भंवरजाल में  फड़फड़ाते लोग घरों में बंद हैं । महानगरों में जिस फुर्सत के लिए , जिस इत्मीनान के लिए , लोग तरसते थे । वह अब लोगों को बिना मांगे ही मिल गया है। जीवन स्थिर है, कहीं जाने का कोई दवाब नहीं , कोई तनाव नहीं ,, यही वह चीज थी,  जिसकी हमें तलाश थी । अब सब परिवार के साथ हैं । इस बीच , भीतर न जाने कितनी, नई चीजें विकसित हो गई है। सोच कितनी बदल गई है। हमारे बीच का बंधन थोड़ा मजबूत हुआ है । लोगों ने इस जटिलता को उद्घाटित किया है। 
 
लोकडाउन के दौरान हम लोगों ने बहुत कुछ सीखा है। हर किसी को अपनी जिंदगी समझ में आई है। सबकी असलियत बाहर आई है। लोगों में अकेले रहने की समझ और क्षमता दोनों विकसित हुई है। लोगों में सकारात्मक बदलाव हुए हैं। मुझे लगता है - कोरोना का प्रकोप खत्म होने के बाद, लोगों की सोच में फर्क आएगा । जो भी हो , लेकिन इस विषाणु के बहाने , सबके हृदय में एक अमृत बह रहा है। वह , यह कि संकट काल में हर जाति , हर पंथ के लोग इकट्ठा हो गए हैं । सभी एक सुर में हो गए हैं । यही इस देश की मजबूती है । विशेषता है । आपत्ति काल , विपदा काल में तो हमारा देश अलग रूप ले लेता है और सबके भीतर शिवत्व जगाता है । अब लोग जिंदगी को जीना सीखेंगें, जो घरों में नहीं रहते थे , वह घर में रहना जान गए। 
 
वर्तमान में कोरोना जैसी महामारी का सामना हम तभी कर सकते हैं , जब हम मानसिक रूप से सशक्त होंगे। इसके लिए हमारे अंदर छिपी शक्तियों को जगाना पड़ेगा । तभी वायरस से शरीर आसानी से लड़ सकता है और महामारी हमारा कुछ नहीं कर पाएगी । हमें अपनी मूल मानव शक्ति को भी जागृत करने की आवश्यकता है  । अब समय आ गया है हमें हाथ मिलाने की परंपरा को हमेशा के लिए गुड बाय कह देना चाहिए । हमें हाथ मिलाकर अभिवादन करने की बजाए " नमस्ते " के जरिए अभिवादन को अपनाना चाहिए । यदि हम "नमस्ते"  के अभिवादन को जीवन का हिस्सा बनाएं , तो हालात बेहतर हो सकते हैं। हम देश हित में नमस्ते करके इसकी शुरुआत का सुझाव दे सकते हैं ।