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कोरोना काल में धौलपुर ने लिखी विकास और विश्वास की नई इबारत, घर वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को मिल रहा रोजगार,घर घर जाकर बांटी पेंशन और अनुग्रह राशि
May 25, 2020 • प्रदीप कुमार वर्मा • राजस्थान
धौलपुर। देश और दुनिया में कोरोना वायरस ने इन दिनों कोहराम मचा रखा है। शासन और सरकारों द्वारा कोरोना से संघर्ष के साथ साथ राहत और बचाव के कार्य किए जा रहे हैं। राजस्थान के पूर्वी सिंहद्वार कहे जाने वाले धौलपुर जिले में कोरोना काल में राहत और बचाव कार्यों के साथ साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और आमजन में विश्वास की नई इबारत लिखी जा रही है।
कोरोना वायरस पर नियंत्रण और विशेष निगरानी के साथ में निर्धारित मानकों की पालना करते हुए विकास कार्य किए जा रहे हैं,जिससे आम जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। डीएम आरके जायसवाल की दूरगामी सोच तथा समय पर लिए सही फैसलों
से मिली इस कामयाबी के धौलपुर मॉडल की चर्चा अब देश और प्रदेश में खूब हो रही है।
 
कोरोना संक्रमण के चलते अपनी रोजी रोटी गवां कर अपने घर वापस लौट रहे प्रवासी मजदूरों के लिए धौलपुर जिला प्रशासन ने मनरेगा में रोजगार के प्रबंध किए हैं। डीएम आरके जायसवाल अपने इस अभिनव प्रयोग के संबंध में बताते हैं कि धौलपुर जिले में कुल 19 हजार 622 प्रवासी मजदूरों का चिन्हीकरण घर वापसी के लिए किया गया है। इनमें से करीब 11 हजार 170
प्रवासी मजदूर वापस आ चुके हैं। इन प्रवासी मजदूरों को मनरेगा में रोजगार देने के लिए उनके नए जॉब कार्ड बनाए जा रहे हैं,वहीं उनके परिवारों के जॉब कार्डों में प्रवासी मजदूरों के नाम का अंकल किया जा रहा है। धौलपुर में अब तक करीब ढाई हजार प्रवासी श्रमिकों को मनरेगा से जोडने की कार्रवाई हो चुकी है। इस कवायद के अमलीजामा पहनने के बाद में परदेश में
अपना रोजगार गवां चुके प्रवासी मजदूरों को उनके घर और गांव में ही रोजगार मिल सकेगा।
 
धौलपुर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मनरेगा में इस पखवाडे में करीब 65 हजार लोगों को रोजगार दिया जा चुका है,जो एक रिकार्ड है। कोरोना संकट के दौरान मनरेगा में लोगों का नियोजन उन्हें आर्थिक संबल प्रदान कर रहा है। जायसवाल बताते हैं कि बीते सालों में मनरेगा में पखवाडे में मिलने वाले रोजगार का आंकडा करीब तीस हजार तक ही
रहता आया है। डीएम आरके जायसवाल का मनरेगा में करीब एक लाख लोगों को रोजगार देने का है,जिसके प्रतिमाह करीब 52 करोड रुपए का भुगतान मजदूरी के रूप में होगा। इससे धौलपुर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नए पंख लगेंगे,वहीं लोगों की आमदनी बढेगी।
 
धौलपुर जिले में लोगों को घर घर जाकर पेंशन तथा अनुग्रह राशि वितरण कार्य किया गया है,जो पूरे देश में एक नई मिसाल और रोल मॉडल के रूप में उभरा है। जिले में अब तक 4.23 लाख लोगों को डोर टू डोर पेंशन और अनुग्रह राशि के करीब 92 करोड रुपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी दस दिनों में जिले के सभी पांच लाख लोगों को उनके घर की दहलीज पर ही जाकर सौ करोड रुपए का राशि का भुगतान करना है। धौलपुर जिला प्रशासन की इस कवायद का सुखद पहलू यह रहा कि दिव्यांग,बुजुर्ग तथा महिलाओं को बैंकों तक नहीं आना पडा, वहीं कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए सबसे जरुररी उपाय माना जाने वाली सामाजिक दूरी की पालना भी सुनिश्चित की जा सकी।
 
कोरोना संकट के समय जब लॉक डाउन हुआ,तो किसान अपनी फसल को बेचने के लिए बाजार तक नहीं आ सके। ऐसे में कृषि उपज मंडी में किसानों को पास जारी करके खरीद के इंतजाम किए गए। मंडी में पूरी जगह अनाज की खरीदारी को ही
मिले,इसके लिए सब्जी और फल मंडी को इंदिरा गांधी स्टेडियम में संचालित किया गया। वहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद के लिए कृषि उपज मंडी के अलावा 22 अन्य गौण मंडियों की स्थापना करके करीब 50 हजार क्विंटल की खरीद की गई। यही,नहीं इस दौरान राज्य एवं केन्द्र सरकार द्वारा संचालित की रहीं अन्य कल्याणकारी योजनाओं का संचालन भी जारी रहा और लाभार्थियों को उनका लाभ मिलता रहा। इन सभी उपायों से धौलपुर जिले के आवाम को कोरोना काल में भी सभी प्रकार की सहूलियत मिली और धौलपुर जिला पूरे देश और प्रदेश में जन सेवा और समर्पण के मामले में अपनी एक विशिष्ट
पहचान भी स्थापित कर सका।