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मंत्र जाप परमात्मा से प्यार करने का तरीका, इसमें कभी जल्दबाजी न करें: आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज
February 22, 2020 • भावेश कीर्ति • राजस्थान
जयपुर। विश्व जागृति मिशन के संस्थापक और देश के जाने माने अध्यात्मवेत्ता आचार्य सुधांशु जी महाराज के सानिध्य में धर्म और अध्यात्म की नगरी और छोटी काशी के रूप में प्रसिद्ध गुलाबी शहर जयपुर के जवाहर नगर स्थित  माहेश्वरी पब्लिक स्कूल में 'गुरु मंत्र सिद्धि साधना' कार्यक्रम का शनिवार को शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम में आचार्य सुधांशु जी महाराज ने साधकों को मंत्र जाप की विधि और इसे सिद्ध करने के तरीके बड़ी बारीकी और विस्तार से समझाएं। उन्होंने बताया कि जब साधक अपनी मंत्र शक्ति पर काम करता है तो सारी देव शक्तियां उस पर एकत्र हो जाती हैं, उसमें दिव्य शक्तियां प्रकट होेने लगती है। विशेषकर जब साधक अपने गुरु के दिए हुए मंत्र का विधिपूर्वक जाप करता है तो उसे अद्भुत लाभ होता है। उन्होंने कहा कि गुरु मंत्र में दिव्य शक्तियां होती हैं, साधक जितनी एकाग्रता से इसका प्रयोग करते हैं, जिंदगी में कमाल का बदलाव होने लगता है और चमत्कार घटित होने शुरू हो जाते हैं। जिंदगी में परिवर्तन लाने के लिए साधक अपने गुरु के दिए हुए मंत्र को जागृत करने के लिए समर्पित भावसे जुटना चाहिए। आचार्य श्री ने कहा की जीवित गुरु जब सामने होते हैं, तो उनके दिए हुए मंत्र का शिष्य को सबसे ज्यादा लाभ होता है। उन्होंने कार्यक्रम में शरीक हुए साधकों को आसन पर बैठने, शुद्धीकरण और माला फेरने की विधि आदि के बारे में भी सूक्ष्मता से जानकारी दी।

जाने माने आध्यात्मिक संत आचार्य सुधांशु जी महाराज ने कहा कि भगवान और देवता मंत्र के अधीन होते हैं। मंत्र तीन प्रकार के होते हैं, वैदिक मंत्र, साबर मंत्र और तांत्रिक मंत्र। इनमें वैदिक मंत्र सबसे शक्तिशाली होते हैं क्योंकि यह भगवान द्वारा ऋषियों के मन में दिए गए मंत्र हैं। उन्होंने गुरु मंत्र को भी इसी श्रेणी का मंत्र बताते हुए इसे मनुष्य जीवन में सबसे कल्याण वाली चीज बताया। आचार्यवर ने कहा कि सिद्ध किया हुआ मंत्र जीवन में चमत्कार लाता है, जब लोग अपने गुरु और नियमों के प्रति वफादार होकर चलते हैं तो मंत्र जागृत होता है। मंत्र जागृत होने के बाद इसे सिद्ध किया जाता है, जब मंत्र सिद्ध हो जाता है तो व्यक्ति के चारों तरफ एक विशेष प्रकार का 'ओरा' या सुरक्षा कवच बन जाता है, जो सभी प्रकार के दुष्प्रभावों से साधक की रक्षा करता है। उन्होंने सती अनुसुइया और सावित्री के उदाहरण देते हुए कहा की मंत्र की शक्ति से ही सावित्री ने यमराज को वापस मोड़ दिया था। सती अनुसुइया के पास भी मंत्रों के बल पर नियंत्रण की शक्ति थी।

विश्व जागृति मिशन के प्रमुख ने कहा की मंत्र जाप भगवान के प्रति प्यार प्रगट करने का माध्यम है। जीवन में हम जिस प्रकार अपने सगे—संबंधियों और मित्रों को प्रेम से पुकारते हैं, उनका प्रेमपूर्वक हाथ थाम कर उन्हें अपने घर में लाकर सत्कार करते हैं, इसी प्रेम की भावना से साधक को मंत्र जाप में भगवान के साथ जुड़ना चाहिए। मंत्र जाप ईश्वर से कनेक्ट होने का तरीका है, साधक को कभी भी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए कभी इस बात पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि माला पूरी हुई है कि नहीं।

विजामि प्रमुख ने बताया कि कि गुरु की शरण में मंत्र साधना का पहला सूत्र शांति है, मंत्र जाप व्यक्ति को शांति की ओर ले जाने वाली यात्रा है, शांति ही मानव की असली संपदा है साधक इसे इकट्ठा करें और इसे निरंतर और नियमित रूप से बढ़ाते हुए मन ही मन यह सोचे कि इसे कभी नहीं खोना है। सुधांशु जी महाराज ने शांति के साथ ही आनंद, संतुलन, सम अवस्था, क्षमा करना एवं क्षमा मांगना, जीवन में अंतिम समय तक सक्रिय एवं कर्म योगी बने रहने तथा दया को अपनाकर गुरु के निर्देशन में साधना के पथ पर आगे बढ़ने की सीख एमपीएस स्कूल के तक्षशिला ऑडिटोरियम में बड़ी संख्या में मौजूद अध्यात्म प्रेमियों को दी। उन्होंने कहा कि साधक को इस पथ पर ले जाने के लिए गुरु ही सबसे बड़ा माध्यम है गुरु की शरण में जाने से ही भाग्य धीरे-धीरे बदलता है और दुर्भाग्य, सौभाग्य में बदल जाता है।

इससे पहले भक्ति और आनंद से सरोबार उत्सवी माहौल में आचार्य श्री के सानिध्य में जयपुर मंडल के प्रमुख्  मदनलाल अग्रवाल, उप प्रधान नारायण दास गंगवानी, मनोज शास्त्री, रमेश चंद्र सेन और द्वारका प्रसाद मुटरेजा एवं अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। रविवार गुरू मंत्र सिद्धी साधना कार्यक्रम का दूसरा और अंतिम सत्र प्रात: 9 बजे से आरम्भ होगा।