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नक्सलियों में बदलाव का नया चेहरा 
February 9, 2020 • Bhavesh • राष्ट्रीय

गुलाब बत्रा

जयपुर। भारत के नक्सल प्रभावित राज्यों के विभिन्न जिलों से आये युवक-युवतियों को समाज जीवन की मुख्यधारा से जोड़कर विकास पथ पर अग्रसर होने के लिये जयपुर में बारहवां आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम आयोजित किया गया है । भारत के गृह मंत्रालय के सहयोग से नेहरू युवा केन्द्र संगठन राजस्थान,युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गत 20 दिसम्बर से सुरेष ज्ञान विहार विष्वविद्यालय,जगतपुरा के परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में उड़ीसा,आंध्रप्रदेष,तेलंगाना तथा महाराष्ट्र प्रांत से दो सौ से अधिक संभागी हिस्सा ले रहे है । 

इन युवाओं के साथ एस्कोर्ट के रूप में आये केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.) के एक अधिकारी से चर्चा के दौरान यह सुनकर अचरज हुआ कि नक्सल प्रभावित इलाकों में कार्यरत् नक्सलियों की कार्यषैली तथा चरित्र में अपेक्षाकृत परिवर्तन देखने को मिल रहा है । विभिन्न राज्यों में अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान प्राप्त अनुभवों को सांझा करते हुये उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के शुरूआती दौर में नक्सली गरीब दलित आदिवासी के हक हूसूलों की रक्षा के लिये अधिक तत्पर रहते थे । बाद में उन्होंने आदिवासी को विकास की धारा से अलग थलग करने का मार्ग अपनाया और इस तबके पर जुल्म ढाने लगे । लेकिन अब नक्सलवाद से जुड़ा एक तबका अपने हितों तथा स्वार्थ पूरा करने में जुट रहा है ।वहीं राजनीतिक सत्ता की होड़ भी इस समस्या के समाधान में बाधायें खड़ी करने में नहीं चूकती । निहित स्वार्थ के चलते राजनीतिक हत्याओं तक को अंजाम दिया जाता है । 

इस अधिकारी का मानना है कि आन्ध्रप्रदेष की सीमा से लगे छत्तीसगढ इलाके में नक्सलवाद का संकट अपेक्षाकृत अधिक है । इसलिये आसन्न खतरे के प्रति सतत सावधानी बरतने की जरूरत है । केन्द्र सरकार भी आवष्यकतानुसार सुरक्षा बलों की तैनाती तथा हालात पर नजर रखे हुये है । आदिवासी बाहुल तथा नक्सली गतिविधियों वाले इलाके से युवा-युवतियों को देष के अन्य क्षेत्रों से रू-ब-रू कराने के लिये ऐसे कार्यक्रम उपयोगी सिद्ध हुये है । ऐसी युवा शक्ति हद इच्छा और मनोबल के साथ संकल्पबद्ध होकर आगे बढ़ने के लिये तत्पर है । आने वाले वर्षो में युवाषक्ति नक्सली गतिविधियों की रोकथाम में मददगार होगी । सरकार की विभिन्न योजनाओं से विकास का मार्ग प्रषस्त हुआ है । फिर भी सफर लम्बा है जिसे मजबूती के साथ पूरा करना है । इसके लिये प्रभावी रणनीति बनाकर उसे कारगर ढंग से लागू करना होगा । 
हकीकत यह है कि नक्सलवाद दीमक की तरह हमारे सामाजिक ताने-बाने को तोड़ने पर आमादा है । कई बार नक्सलियों का खुफिया तंत्र सरकारी खुफिया तंत्र से अपेक्षाकृत मजबूत दिखायी देता है । सरकारी तंत्र से जुड़ी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखकर नुकसान पहुँचाने में भी सफल हो जाते है । जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के निवासियों को विष्वास में लेते हुये विकास से जुड़ी योजनाओं से लाभान्वित करने की ठोस पहल की जानी चाहिये । केन्द्र और संबंधित राज्य सरकारों को आपस में बेहतर तालमेल बिठाकर नक्सली तंत्र को नेस्तनाबूद करने के लिये हद संकल्प से काम करना होगी तभी नक्सली गतिविधियों पर अंकुष लग पायेगा । पिछले दषक से आदिवासी युवा आदान प्रदान कार्यक्रम में शामिल युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी भी सुनिष्चित करनी होगी ।