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संविधान ही हमारा मूल ग्रन्थ हैं - राज्यपाल
February 15, 2020 • भावेश कीर्ति • राजस्थान
 
जयपुर। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा है कि गत 26 नवम्बर को पूरे देश में 70 वां संविधान दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि संविधान हमारा मार्गदर्शक है, हमारा मूल ग्रन्थ है।
 
मिश्र शनिवार को लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने इस मौके पर उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल राम नाईक का अभिनन्दन किया। समारोह का आयोजन रंग भारती संस्था द्वारा किया गया।  
राज्यपाल मिश्र ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में राष्ट्र की मूल भावना का उल्लेख है। संविधान ने हमें मौलिक अधिकार दिये हैं। संविधान के अनुच्छेद 51 (क) में हमारे द्वारा किये जाने वाले कर्तव्यों को परिभाषित किया गया है। मौलिक अधिकार और कर्तव्य, यह दोनों ही संविधान के प्रमुख स्तम्भ हैं। मौलिक अधिकारों की तो हम बात करते हैं, लेकिन आवश्यकता है कि हम हमारे मूल कर्तव्यों को जानें, समझें और उनके अनुरूप ही अपना कार्य और व्यवहार करें। 
 
राज्यपाल मिश्र ने कहा कि युवाओं को राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। इसलिए संविधान में प्रदत्त मूल कर्तव्यों को युवा आचरण में लाकर आगे बढ़ें। यदि हम सभी ने ऎसा प्रयास किया तो निश्चित तौर पर भारत देश को आगे बढ़ाने में और स्वयं के जीवन को भी प्रोनन्त करने में यह कदम बेहतरीन साबित होगा। 
      
राज्यपाल मिश्र ने कहा कि आमजन को संविधान की जानकारी होना आवश्यक है। राष्ट्रीय एकता, अखण्ड़ता व सामाजिक समरसता के लिए कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। मैं चाहता हूं कि विश्वविद्यालयों में युवाओं को मूल कर्तव्यों का ज्ञान कराने के लिए अभियान चलाया जाये। देश की युवा पीढी को मूल कर्तव्यों के बारे में बताया जाना आवश्यक है। संविधान के अनुच्छेद 51 क पर विचार - विमर्श करने के लिए गोष्ठियां व सेमीनार आयोजित की जायें। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिकगण मौजूद थे।