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सीमा सड़क संगठन ने कोविड-19 लॉकडाउन के बावजूद तीन सप्ताह पहले ही खोल दिया रोहतांग दर्रा
April 25, 2020 • तहलका ब्यूरो • राष्ट्रीय

नई दिल्ली। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने कोविड-19 लॉकडाउन के बीच आज बर्फ की सफाई के बाद तीन सप्ताह से ज्यादा समय पहले ही रोहतांग दर्रा (समुद्री स्तर से 13,500 फुट ऊपर) खोल दिया है। यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले को भारत के बाकी हिस्से से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। पिछले साल इस दर्रे को 18 मई को खोला गया था।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने बर्फ की सफाई में तेजी लाने के लिए बीआरओ से संपर्क किया था, जिससे फसलों की कटाई शुरू करने के लिए किसानों की वापसी को आसान बनाया जा सके और कोविड-19 को ध्यान में रखते हुए लाहौल घाटी में राहत सामग्री पहुंचाई जा सके तथा आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही तेज की जा सके।

बीआरओ ने इस कार्य के लिए मनाली और खोकसार दोनों तरफ से उच्च तकनीक वाली मशीनरी लगाई थीं। रहाला झरना, बीस नाला और रानी नाला में बर्फीले तूफान, जमा देने वाला तापमान और नियमित अंतराल पर होने वाले हिमस्खलन के चलते परिचालन में देरी हुई, लेकिन लाहौल घाटी के नागरिकों तक राहत पहुंचाने के लिए कोविड-19 से बर्फ की सफाई करने वाले दल दिन और रात काम में लगी रहीं। इस दौरान उन्होंने कोविड-19 से जुड़ी सभी सावधानियां भी बरतीं।

आज लाहौल स्पीति के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लगभग 150 किसानों से भरे वाहनों की पहली खेप रवाना की गई, जिसका मार्गदर्शन इस साल रोहतांग पास खोलने वाला बीआरओ अधिकारियों का दल कर रहा था। रोहतांग दर्रा पिछले साल की तुलना में तीन सप्ताह पहले ही यातायात के लिए खोले जाने की खबर से स्थानीय लोगों को खासी राहत मिली है। इससे केन्द्र और राज्य सरकारों के लिए स्थानीय आबादी तक राहत सामग्रियां और चिकित्सा सामान पहुंचाना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही कृषि गतिविधियां भी फिर से चालू हो सकेंगी, जो जिले की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ के समान हैं।

दर्रे को खोलने के लिए बर्फ की सफाई का काम हर साल किया जाता है, क्योंकि हर साल नवंबर से मई के मध्य तक लगभग छह महीने तक रोहतांग दर्रा बर्फ से पटा रहता है। यह 12 दिसंबर, 2019 तक खुला रहा था। पूरी घाटी सर्दियों के दौरान किसी भी तरह की ढुलाई/ आपूर्तियों के लिए हवाई माध्यम पर निर्भर रहती है।

इसके अलावा कोविड-19 के खिलाफ सरकार के प्रयासों में सहायता के लिए सीमा सड़क संगठन के सभी कर्मचारियों ने एक दिन के वेतन के रूप में पीएम केयर्स कोष में सामूहिक तौर पर एक करोड़ रुपये का अंशदान किया है।